Bandar Aur Bakri | The Monkey and the Goat: A Friendship Tale
About this video
A monkey and goat friendship is tested by a fallen nest in Bandar Aur Bakri, a warm lesson about responsibility and repair.
The monkey and goat friendship at the heart of this story is known throughout the Champakvan forest. The young monkey is quick and lively; the patient goat is calm and kind. One morning the monkey remembers a tree at the forest edge covered with ripe strawberries. He invites his friend to share them, leads her along the woodland path, and climbs high to pick the fruit.
Wanting to work faster, the monkey shakes a heavy branch. Strawberries fall, but so does a hidden nest with tiny sparrow chicks inside. The goat immediately asks him to stop. Instead of hiding his mistake, the monkey climbs down, checks the chicks, and carefully returns the nest to a stable fork in the tree. When the mother sparrow comes home, she learns that the goat noticed the danger and the monkey took responsibility for fixing it.
Bandar Aur Bakri is an animated Hindi animal friendship tale about what real friendship looks like after something goes wrong. A true friend speaks up with care, and a responsible friend listens, admits the mistake, and makes amends. The story also reminds us that our fun should never come at another family's cost. By slowing down and protecting the nest, the monkey and goat turn an accident into a new friendship with the sparrow. Watch the fruit-tree rescue and tell us: which mattered more, the goat's warning or the monkey's decision to act?
Chapters
0:00 Friends in Champakvan
0:14 A Sweet Invitation
0:55 Journey to Fruit Tree
2:42 The Hidden Nest Falls
3:57 Fixing the Mistake
6:26 Three Friends and the Moral
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Hindi transcript
The narration as spoken, from the caption track uploaded with this video.
- 0:04.088 चंपकवन की हरी-भरी छाँव में एक चंचल बंदर और शांत स्वभाव की बकरी रहते थे। दोनों की मित्रता पूरे जंगल में प्रसिद्ध थी।
- 0:14.13 सुख का दिन हो या कठिन घड़ी, दोनों बिना बुलाए एक-दूसरे के पास पहुँचते और अपनी समझ के अनुसार हर संभव सहायता करते थे।
- 0:24.171 जंगल के दूसरे जानवर उनकी एकता देखकर प्रसन्न होते थे, क्योंकि बंदर और बकरी का व्यवहार सच्ची मित्रता का सरल उदाहरण था।
- 0:34.213 बंदर तेज, फुर्तीला और बुद्धिमान था। पेड़ों की ऊँची डालों से लेकर घुमावदार पगडंडियों तक, वह चंपकवन का हर कोना जानता था।
- 0:45.255 बकरी धैर्यवान और दयालु थी। वह बंदर की चंचलता को समझती और जल्दबाजी में भी उसे सही बात याद दिलाना कभी नहीं भूलती थी।
- 0:55.296 एक सुबह बंदर ने देखा कि बकरी रोज की तरह घास और पत्ते खा रही थी। तभी उसे जंगल के किनारे का फलदार पेड़ याद आया।
- 1:03.338 उस पेड़ पर लाल-लाल स्ट्रॉबेरी लगी थीं। बंदर ने सोचा कि अपनी प्यारी मित्र को नया स्वाद चखाकर उसका दिन आनंद से भर देना चाहिए।
- 1:14.38 मेरी प्यारी मित्र, आज केवल घास और पत्ते मत खाओ। मेरे साथ चलो, मैं तुम्हें जंगल की सबसे मीठी स्ट्रॉबेरी खिलाऊँगा।
- 1:23.421 तुम्हें मेरी पसंद का इतना ध्यान है, यह जानकर मन प्रसन्न हो गया। चलो, आज तुम्हारे बताए उस मीठे फल का स्वाद अवश्य चखती हूँ।
- 1:32.463 मित्र की बात सुनते ही बकरी के मुँह में पानी आ गया। उसे लगा कि बंदर सचमुच उसका बहुत ध्यान रखने वाला उदार साथी है।
- 1:40.505 दोनों साथ-साथ जंगल के किनारे की ओर चल पड़े। आगे बंदर रास्ता दिखाता रहा और बकरी सँभलकर उसके पीछे कदम बढ़ाती रही।
- 1:50.546 रास्ते में कहीं घनी झाड़ियाँ थीं, तो कहीं सूखे पत्तों से ढकी पगडंडी। बंदर परिचित मोड़ों पर रुककर बकरी को सुरक्षित दिशा बताता रहा।
- 2:02.588 थोड़ी दूर चलने के बाद दोनों उस पेड़ के पास पहुँचे, जिसकी फैली डालों के बीच पकी हुई स्ट्रॉबेरी लाल दीपकों की तरह चमक रही थीं।
- 2:11.63 इतने सुंदर फल देखकर बकरी की आँखें चमक उठीं। वह पेड़ के नीचे खड़ी रही, जबकि बंदर ने फुर्ती से मजबूत तना पकड़ लिया।
- 2:20.671 कुछ ही क्षणों में बंदर ऊँची डाल पर जा बैठा। उसने पके फल चुने और एक-एक करके सावधानी से नीचे अपनी मित्र के पास गिराने लगा।
- 2:32.713 बकरी हर स्ट्रॉबेरी चखकर आनंदित होती, पर फल तोड़ने में काफी समय लग रहा था और डालों पर बहुत से पके फल बाकी थे।
- 2:41.755 बंदर ने जल्दी करने की तरकीब सोची। उसने एक मोटी डाल पकड़कर जोर-जोर से हिलाना शुरू किया, ताकि सारे फल एक साथ नीचे गिर जाएँ।
- 2:51.796 डाल हिलते ही लाल फल पत्तों संग वर्षा की तरह नीचे आने लगे। बकरी उन्हें चुनती और जल्दी-जल्दी मीठे फलों का स्वाद लेती रही।
- 3:00.838 उसी घनी डाल के बीच पत्तों से ढका एक छोटा घोंसला भी था। उसमें चिड़िया के नन्हे चूजे अपनी माँ की प्रतीक्षा कर रहे थे।
- 3:09.88 चिड़िया अपने चूजों के लिए दाना लेने बाहर गई थी। इसलिए वहाँ कोई नहीं था, जो बंदर को छिपे घोंसले के बारे में सावधान करता।
- 3:18.921 बार-बार झटके लगने से घोंसला डगमगाने लगा। फिर अचानक वह डाल से छूटा और नन्हे चूजों सहित नरम घास पर आ गिरा।
- 3:28.963 सहमे हुए चूजों को नीचे देखकर बकरी का आनंद तुरंत चिंता में बदल गया। उसने फल छोड़ दिए और अपने मित्र को आवाज देकर रोक लिया।
- 3:39.005 मित्र, डाल हिलाना तुरंत बंद करो। पहले इस घोंसले और चिड़िया के बच्चों को सुरक्षित उसी पेड़ पर वापस रखना हमारा कर्तव्य है।
- 3:48.046 तुम ठीक कहती हो। मेरी जल्दबाजी से यह संकट आया है, इसलिए फल बाद में खाएँगे; पहले मैं बच्चों को उनकी सुरक्षित जगह पहुँचाता हूँ।
- 3:57.088 बंदर तेजी से नीचे उतरा, पर घोंसले के पास पहुँचकर उसकी चाल सावधान हो गई। उसने दोनों हाथों से उसे बहुत कोमलता से उठाया।
- 4:07.13 बकरी ने देखा कि सभी चूजे सुरक्षित हैं। फिर उसने पेड़ की एक स्थिर डाल की ओर इशारा किया, जहाँ घोंसला अच्छी तरह टिक सकता था।
- 4:17.171 बंदर घोंसला सँभालकर फिर ऊपर चढ़ा और उसे उसी सुरक्षित स्थान पर टिका दिया। नन्हे चूजे पत्तों की छाँव में शांत होने लगे।
- 4:27.213 नीचे खड़ी बकरी ने राहत की साँस ली। बंदर को भी समझ आया कि बुद्धिमानी केवल तरकीब खोजने में नहीं, उसके परिणाम पहचानने में है।
- 4:37.255 दोनों ने बचे हुए फल समेटे और पेड़ से दूर हट गए। मीठे स्वाद की चाह में किसी परिवार को कष्ट पहुँचते-पहुँचते बचा था।
- 4:47.296 तभी चिड़िया अपनी चोंच में दाना लेकर लौट आई। उसने बंदर और बकरी को जाते देखा, फिर घबराकर सीधे अपने घोंसले की ओर उड़ चली।
- 4:57.338 नन्हे चूजों ने चहककर माँ को पूरी घटना बताई। डाल हिली थी, पर बकरी ने संकट देखा और बंदर ने अपनी गलती सुधार दी।
- 5:06.38 घोंसले को सुरक्षित और चूजों को सकुशल देखकर चिड़िया की चिंता मिट गई। वह तुरंत बंदर और बकरी के पीछे उड़कर उनके पास पहुँची।
- 5:16.421 कृपया यहीं रुक जाइए। भूल होने के बाद भी आपने मेरे बच्चों को हानि से बचाया और घोंसला फिर सुरक्षित रखा; मैं आपकी आभारी हूँ।
- 5:27.463 इस पेड़ के पास कई स्वादिष्ट फल मिलते हैं। आप दोनों कुछ दिन यहीं रहिए, ताकि हम साथ समय बिताएँ और एक-दूसरे की सहायता करें।
- 5:36.505 चिड़िया की स्नेह भरी बात सुनकर बंदर और बकरी रुक गए। दोनों ने एक-दूसरे की ओर देखा और मुस्कराकर उसके प्रस्ताव पर विचार किया।
- 5:46.546 हमें तुम्हारा निमंत्रण स्वीकार है। हम कुछ दिन यहीं रहेंगे, और आगे से फल लेते समय पेड़ पर रहने वाले हर जीव का ध्यान रखेंगे।
- 5:55.588 आज की घटना ने बताया कि सच्चा मित्र गलती छिपाता नहीं, सही बात कहता है और उसे मिलकर सुधारने में पूरा साथ देता है।
- 6:03.63 चिड़िया उत्तर सुनकर खुश हुई। उस दिन से तीनों साथ रहने लगे और भोजन या कठिन समय में एक-दूसरे की मदद करने लगे।
- 6:13.671 उनकी नई मित्रता पूरे चंपकवन के लिए सीख बन गई। मीठे फल का आनंद भी बढ़ गया, क्योंकि अब उसमें सावधानी, दया और साझेदारी शामिल थी।
- 6:25.713 इस कथा की सीख है कि अपने स्वार्थ के लिए कभी किसी को नुकसान नहीं पहुँचाना चाहिए। ऐसी कहानियाँ साझा करना भलाई को आगे बढ़ाता है।