Chatur Bandar Aur Sher | The Well That Trapped a Tyrant
About this video
It is the monkey's turn to visit the lion's cave. How can he escape and protect the forest?
Chatur Bandar Aur Sher pits a calm little monkey against a fearsome lion whose own reflection becomes the perfect trap.
Chatur Bandar Aur Sher begins in peaceful Champak Van, where a huge lion arrives and turns every roar into fear. To stop his daily attacks, the forest animals agree that one of them will report to his cave each day. The numbers in the forest keep falling until the clever monkey's turn arrives. He walks slowly, searching for any way to protect himself and his neighbors.
On the path, the monkey looks into an old stone well and sees his reflection. That simple discovery becomes a plan. He reaches the lion late and claims that a larger rival stopped him, stole two lambs, and declared himself the true king of the forest. Furious, the lion demands to meet this challenger. The monkey leads him to the well and points toward the dark water. The lion sees his own face below, roars, and hears the echo return as another roar. Anger keeps him from recognizing either reflection or echo, so he leaps inside and becomes trapped in the deep, slippery well.
The monkey carries the news back to Champak Van, and the animals celebrate the end of their fear. This animated Hindi animal fable never needs the smallest hero to become stronger than the lion. He wins by observing carefully, staying patient, and allowing uncontrolled pride to defeat itself. The lesson is about calm intelligence, courage under pressure, and pausing before anger turns an illusion into a disaster. Strength can intimidate a forest, but good judgment can free it.
Chapters
0:00 A Tiny Hero's Promise
0:16 Fear Reaches Champak Van
0:57 The Forest Makes a Deal
3:47 A Reflection Sparks a Plan
5:54 The Lion Meets Himself
6:49 Courage Frees the Forest
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Hindi transcript
The narration as spoken, from the caption track uploaded with this video.
- 0:04.088 चंपक वन के एक नन्हे बंदर ने उस खूँखार शेर को हरा दिया, जिससे पूरा जंगल काँपता था। उसके पास ताकत नहीं थी, बस एक तेज़ दिमाग था।
- 0:16.13 बहुत समय पहले चंपक वन बड़ा सुंदर और हरा-भरा जंगल था। ऊँचे पेड़, नरम घास और रंग-बिरंगे फूल हर तरफ़ बिखरे रहते थे।
- 0:27.171 वन के पास ही एक नदी बहती थी, इसलिए पानी के लिए दूर नहीं जाना पड़ता था। हिरण, खरगोश और मोर दिन भर बेफ़िक्र होकर खेलते थे।
- 0:37.213 यहाँ के जानवर एक-दूसरे के सुख-दुख में हमेशा साथ खड़े रहते थे। इसी अपनेपन के कारण वह जंगल सबको अपने घर जैसा लगता था।
- 0:47.255 उसी वन के सबसे ऊँचे पीपल पर एक बंदर रहता था। वह छोटा और दुबला था, पर उसकी बुद्धि बहुत तेज़ थी। सब उसी से सलाह लेते थे।
- 0:57.296 एक दिन इस शांत जंगल में एक नया मेहमान आ पहुँचा। वह एक विशाल और खूँखार शेर था, जो दूर पहाड़ों से भटकता हुआ यहाँ आ गया था।
- 1:08.338 शेर ने चारों ओर नज़र दौड़ाई और मन ही मन खुश हो गया। इतने सारे छोटे जानवर एक ही जगह थे। अब उसे भोजन के लिए भटकना नहीं था।
- 1:19.38 उस दिन से शेर हर सुबह शिकार पर निकल पड़ता। वह ऊँची घास में छिपकर बैठता, और उसकी भूख एक शिकार से कभी शांत नहीं होती थी।
- 1:29.421 धीरे-धीरे चंपक वन की हँसी गायब हो गई। नदी किनारे अब कोई खेलता नहीं था, और हर जानवर अपने बिल में दुबका रहने लगा।
- 1:39.463 डर इतना बढ़ा कि जानवरों ने एक गुप्त सभा बुलाई। सबको लगा कि यही चलता रहा तो पूरा जंगल खाली हो जाएगा। तभी वह चतुर बंदर नीचे उतरा।
- 1:50.505 साथियो, डरने से कुछ नहीं होगा। यह रोज़ का शिकार बंद करना होगा। मेरे मन में एक बात है। चलिए, हम सब मिलकर शेर से बात करते हैं।
- 2:01.546 अगली सुबह सारे जानवर एक साथ शेर की गुफा की ओर बढ़ चले। शेर उन्हें आते देखकर खुश हो गया, क्योंकि आज दावत सामने चलकर आ रही थी।
- 2:11.588 शेर दादा, हमारे लिए रोज़ इधर-उधर मत भटकिए। हर दिन हममें से एक जानवर स्वयं आपकी गुफा तक पहुँच जाएगा, और शिकार की मेहनत नहीं करनी पड़ेगी।
- 2:21.63 बात तो पते की है, मुझे यह शर्त मंज़ूर है। लेकिन ध्यान से सुन लो। अगर किसी दिन मैं भूखा सो गया, तो हर जानवर को खोज निकालूँगा।
- 2:30.671 जानवरों ने शर्त मान ली और उसी दिन से बारी-बारी जाना शुरू कर दिया। शेर को अब बैठे-बैठे भोजन मिलने लगा और वह आलस में डूब गया।
- 2:41.713 दिन बीतते गए और वन की गिनती घटती गई। हर सुबह किसी न किसी घर में सन्नाटा छा जाता था, पर किसी के पास कोई दूसरा रास्ता नहीं था।
- 2:53.755 फिर वह सुबह भी आ गई, जब जाने की बारी उसी चतुर बंदर की थी। सब जानवर उदास हो गए। बंदर ने गहरी साँस ली और गुफा की ओर चल पड़ा।
- 3:05.796 रास्ते भर उसके मन में एक ही बात घूम रही थी। उसे अपने साथियों को भी बचाना था। वह सोचता रहा कि यह लड़ाई बुद्धि से कैसे जीती जाए।
- 3:15.838 तभी रास्ते के किनारे उसे एक पुराना कुआँ दिखाई दिया। उसकी दीवारें ऊँची और पत्थर की थीं, और भीतर गहरा साफ़ पानी भरा हुआ था।
- 3:25.88 बंदर ने कुएँ के किनारे से झाँका और पानी में उसे अपनी ही परछाईं दिखाई दी। उसी पल उसके चेहरे पर एक हल्की मुस्कान आ गई।
- 3:34.921 बंदर जान-बूझकर बहुत धीरे चला और सूरज ढलने के बाद गुफा तक पहुँचा। उधर शेर सुबह से भूखा बैठा था और गुस्सा सिर पर चढ़ा था।
- 3:46.963 बंदर को देखते ही शेर ज़ोर से दहाड़ता हुआ खड़ा हो गया। बंदर ने डरने का अभिनय किया और दोनों हाथ जोड़कर सिर झुका लिया।
- 3:56.005 इतनी देर कहाँ लगा दी? और यह क्या, तू तो बहुत छोटा है। तुझे खाकर मेरी भूख कैसे मिटेगी? आज मैं भूखा सोया तो कल कोई नहीं बचेगा।
- 4:06.046 महाराज, थोड़ी दया कीजिए। मैं अकेला नहीं आ रहा था। आपकी भूख मिटाने के लिए मेरे साथ दो मोटे-ताज़े मेमने भी आ रहे थे।
- 4:15.088 पर बीच रास्ते में हमें एक दूसरा शेर मिल गया, जो कद में आपसे भी बड़ा था। उसने दोनों मेमने छीन लिए और खुद को जंगल का राजा बताया।
- 4:26.13 यह सुनते ही शेर का चेहरा गुस्से से तमतमा उठा। उसकी मूँछें फड़कने लगीं। इस जंगल में कोई और राजा हो, यह उससे बर्दाश्त नहीं हुआ।
- 4:37.171 क्या कहा? मेरे रहते इस जंगल का राजा कोई और? मुझे अभी उससे मिलाओ। मैं आज ही उसे बता दूँगा कि यहाँ किसका राज चलता है।
- 4:46.213 नहीं महाराज, रहने दीजिए। वह बहुत बलवान है और उसका किला भी मज़बूत है। मेरी मानिए, इस समय चुप रह जाना ही ठीक रहेगा।
- 4:54.255 आप नहीं मानेंगे तो ठीक है महाराज, चलिए। रास्ते के किनारे एक पुराना कुआँ है, और वह उसी के भीतर अपना किला बनाकर बैठा है।
- 5:03.296 शेर आगे-आगे लंबे डग भरता हुआ चला और बंदर पीछे-पीछे चुपचाप चलता रहा। कुछ ही देर में दोनों उस पुराने कुएँ के पास पहुँच गए।
- 5:14.338 बंदर ने कुएँ की ओर इशारा किया और खुद दो कदम पीछे हट गया। शेर मुंडेर पर चढ़ा और गर्दन झुकाकर भीतर झाँकने लगा।
- 5:23.38 नीचे गहरे पानी में उसे एक शेर दिखाई दिया। वह उसका अपना ही प्रतिबिंब था, पर गुस्से में भरे शेर को यह बात समझ नहीं आई।
- 5:32.421 उसने पूरी ताकत से एक भयानक दहाड़ लगाई। कुएँ की गहराई से वैसी ही दहाड़ गूँजकर वापस आ गई, मानो नीचे से चुनौती मिल रही हो।
- 5:43.463 आपे से बाहर होकर शेर ने कुएँ के भीतर छलांग लगा दी। दीवारें बहुत ऊँची और फिसलन भरी थीं, इसलिए वह वहीं फँसकर रह गया।
- 5:53.505 थोड़ी देर बाद कुएँ से आती हुई आवाज़ें शांत हो गईं। चंपक वन पर मँडराता हुआ डर उसी शाम हमेशा के लिए मिट गया। बंदर ने चैन की साँस ली।
- 6:05.546 बंदर उछलता-कूदता चंपक वन पहुँचा और सारी बात सबको कह सुनाई। पहले किसी को यकीन नहीं हुआ, फिर सब दौड़कर कुएँ तक देख आए।
- 6:16.588 उसके बाद पूरे जंगल में खुशी की लहर दौड़ गई। हिरण उछलने लगे, मोर नाचने लगे, और सबने उस छोटे बंदर को कंधों पर उठा लिया।
- 6:27.63 उस दिन के बाद चंपक वन में फिर वही पुरानी रौनक लौट आई। नदी किनारे शाम को उस चतुर बंदर की कहानी बार-बार सुनाई जाती थी।
- 6:37.671 इस कथा का संदेश यही है कि ताकत हमेशा सबसे बड़ी नहीं होती। शांत मन और तेज़ बुद्धि हर मुश्किल का हल निकाल ही लेती है।
- 6:48.713 यह कहानी अच्छी लगी हो तो इसे अपने साथियों तक ज़रूर पहुँचाइए। ऐसी और कहानियों के लिए KiddoTunes Studio को सब्सक्राइब कीजिए।