Akal Badi Ya Bhains | Wit Beats Strength in This Fable
About this video
Aklu cannot swim. How will he cross the pond before the buffalo?
Akal Badi Ya Bhains turns a pond race into a playful test of whether clear thinking can beat raw strength.
Akal Badi Ya Bhains begins beside a quiet forest pond, where quick-witted Aklu laughs when a powerful buffalo emerges from her bath still covered in mud. The teasing soon becomes an argument. Aklu says a sharp mind matters more than muscle, while the buffalo insists that strength always wins. Their noisy debate draws the forest animals to the bank and brings Sher Singh, the forest king, to settle it fairly.
Sher Singh proposes a simple contest: whoever crosses the pond and reaches the far bank first will prove the point. The buffalo is delighted because she can swim with ease. Aklu cannot swim at all, but instead of panicking, he studies the pond, the old mango tree, and his opponent. When the race begins, he swings from a low branch onto the buffalo's broad back and rides safely across. Just before she steps onto dry land, Aklu leaps ahead and touches the far bank first. His plan uses the buffalo's strength without pretending he possesses it himself.
The buffalo accepts the result with good humor, and the two rivals become friends. The lesson is not that strength has no value. It is that patience, observation, and calm thinking can solve a problem that force alone cannot. This animated Hindi proverb story also shows how a quarrel can end in respect when both sides accept a fair result. It is a warm animal fable about resourcefulness, humility, and using every available clue before acting.
Chapters
0:00 Wisdom or Strength
0:19 Life by the Pond
1:03 A Joke Turns Sour
1:46 The Forest Debate
2:59 Sher Singh Decides
5:00 Aklu Finds a Way
6:09 The Clever Crossing
7:26 Newfound Respect
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Hindi transcript
The narration as spoken, from the caption track uploaded with this video.
- 0:04.088 अक्ल बड़ी या भैंस, यह कहावत बरसों से चली आ रही है। इसका मतलब है कि ताकत से कहीं ज़्यादा बड़ी चीज़ होती है समझदारी। आज इसी कहावत के पीछे छिपी एक बहुत मज़ेदार कहानी सुनने को मिलेगी।
- 0:19.13 बहुत समय पहले की बात है, एक हरे-भरे जंगल में एक बड़ा-सा तालाब हुआ करता था, और उसी तालाब के किनारे आम का एक बहुत पुराना पेड़ खड़ा था। उसी घने पेड़ पर एक छोटा-सा बंदर रहता था।
- 0:34.171 वह बंदर इतना समझदार और सूझबूझ वाला था कि जंगल के सारे जानवर उसे बड़े प्यार से अकलू कहकर बुलाते थे। किसी की भी मुश्किल हो, अकलू के पास कोई न कोई तरकीब ज़रूर निकल आती थी।
- 0:48.213 एक दिन दोपहर की तेज़ धूप थी और पूरा जंगल शांत पड़ा हुआ था। अकलू आम की ठंडी छाँव में बैठकर तालाब से आती हवा का मज़ा ले रहा था। तभी धीरे-धीरे चलती हुई एक बड़ी-सी भैंस तालाब के किनारे आ पहुँची।
- 1:03.255 भैंस को पानी में रहना बहुत पसंद था। वह देखते ही देखते सीधे तालाब में उतर गई और खुशी-खुशी लोटपोट करते हुए नहाने लगी। ऊपर डाल पर बैठा अकलू बड़ी देर तक उसका यह मज़ेदार खेल देखता रहा।
- 1:18.296 काफ़ी देर बाद जब भैंस पानी से बाहर निकली, तो सबने देखा कि उसके पूरे शरीर पर पहले जैसा ही कीचड़ लगा हुआ था। यह देखकर अकलू अपनी डाल पर बैठा-बैठा खी-खी करके हँसने लगा।
- 1:32.338 हँसी की आवाज़ सुनकर भैंस ने गर्दन उठाकर ऊपर की ओर देखा। अपने ऊपर किसी को यूँ हँसते देख उसे मन ही मन थोड़ा बुरा लगा, और उसने ज़रा नाराज़ होते हुए अकलू से पूछा।
- 1:46.38 अरे भई, तुम इतना ज़ोर-ज़ोर से हँस क्यों रहे हो? क्या अपने से बड़ों पर इस तरह हँसना कोई अच्छी बात है? ज़रा नीचे आकर मुझे भी तो बताओ कि आख़िर तुम्हें हँसी क्यों आ रही है।
- 1:57.421 माफ़ कीजिए भैंस बहन, मैं आप पर बिलकुल भी नहीं हँस रहा। मुझे तो आपके नहाने के तरीके पर हँसी आ रही है। भला कोई इस तरह भी नहाता है क्या, ज़रा आप ही सोचकर बताइए।
- 2:08.463 आप इतनी देर तक पानी के अंदर रहीं, फिर भी आपके पूरे शरीर पर उतना ही कीचड़ लगा हुआ है, जितना पहले लगा था। तो फिर इतनी देर तक नहाने से आख़िर फ़ायदा ही क्या हुआ?
- 2:19.505 और देखिए, आपने अपने साथ-साथ इस तालाब का साफ़-सुथरा पानी भी गँदला कर दिया। अब यहाँ पानी पीने आने वाले जंगल के बाकी जानवर क्या करेंगे, ज़रा यह भी तो सोचिए भैंस बहन।
- 2:31.546 अकलू की यह बात सुनकर भैंस को अपनी बड़ाई पर ज़रा चोट-सी लगी। जंगल के सबसे भारी और ताकतवर जानवरों में गिनी जाने वाली भैंस को एक नन्हे-से बंदर की यह सीख बिलकुल अच्छी नहीं लगी।
- 2:46.588 तुम मुझसे कितने छोटे हो, ज़रा अपने आप को देखो तो सही। ताकत में इस पूरे जंगल में मेरा मुकाबला भला कौन कर सकता है? तुम्हारी बड़ी-बड़ी बातें सुनकर तो मुझे हँसी आ रही है।
- 2:58.63 अगर सचमुच तुम इतने ही अक्लमंद हो, तो पेड़ से नीचे उतरकर मेरे सामने आओ। आज यह बात तय हो ही जाए कि हम दोनों में बड़ा कौन है, तुम्हारी छोटी-सी अक्ल या फिर मेरी बड़ी ताकत।
- 3:10.671 अकलू फुर्ती से पेड़ से नीचे उतर आया, और फिर दोनों तालाब के किनारे आमने-सामने खड़े होकर ज़ोर-ज़ोर से अपनी-अपनी बात कहने लगे। दोनों में से कोई भी झुकने को तैयार नहीं था।
- 3:23.713 इतना शोर सुनकर जंगल के सारे जानवर दौड़ते हुए तालाब के किनारे इकट्ठा हो गए। सबने अपने-अपने तरीके से दोनों को समझाने की बहुत कोशिश की, पर किसी की भी बात इन दोनों ने नहीं मानी।
- 3:38.755 तभी उसी रास्ते से जंगल के राजा शेर सिंह टहलते हुए गुज़र रहे थे। तालाब के किनारे इतनी बड़ी भीड़ जमा देखकर वे वहीं रुक गए और अपनी शांत आवाज़ में सबसे पूछने लगे।
- 3:51.796 अरे भाई, आज यहाँ इतनी बड़ी भीड़ क्यों जमा है? कोई मुझे भी तो बताए कि आख़िर बात क्या हुई है। जंगल में सब कुछ ठीक-ठाक तो है न, किसी को कोई परेशानी तो नहीं?
- 4:03.838 महाराज, हम दोनों बस यही तय करना चाहते हैं कि बड़ी अक्ल होती है या फिर ताकत। भैंस बहन का कहना है कि ताकत, और मेरा कहना है कि सबसे बड़ी तो अक्ल ही होती है।
- 4:16.88 फिर अकलू ने शुरू से आख़िर तक सारी बात राजा शेर सिंह को सच-सच कह सुनाई, और भैंस ने भी सिर हिलाकर मान लिया कि हाँ महाराज, बात बिलकुल ऐसी ही हुई थी, इसमें कोई झूठ नहीं है।
- 4:31.921 तो अब मेरा फ़ैसला ध्यान से सुनो। तुम दोनों में से जो भी यह तालाब बीच से पार करके सबसे पहले उस दूसरे किनारे पहुँच जाएगा, आज उसी को बड़ा और समझदार माना जाएगा।
- 4:45.963 राजा की यह बात सुनते ही अकलू के चेहरे की हँसी एकदम गायब हो गई। कारण यह था कि उसे तैरना बिलकुल भी नहीं आता था, और सामने वाला तालाब भी काफ़ी चौड़ा और गहरा था।
- 5:00.005 थोड़ी ही देर में राजा शेर सिंह और जंगल के बाकी सब जानवर घूमकर तालाब के दूसरे किनारे पर जा पहुँचे, ताकि वे वहीं बैठकर इस अनोखे मुकाबले को आराम से देख सकें।
- 5:13.046 इस किनारे पर अब सिर्फ़ अकलू और भैंस ही बचे थे। भैंस अपनी ताकत पर पूरा भरोसा रखते हुए पानी के बिलकुल पास खड़ी थी और बड़े आराम से राजा के इशारे का इंतज़ार कर रही थी।
- 5:26.088 उधर अकलू के दिल की धड़कन तेज़ होती जा रही थी। वह बार-बार बस यही सोच रहा था कि इतना बड़ा और गहरा तालाब वह आख़िर पार कैसे कर पाएगा, जबकि उसे तैरना आता ही नहीं।
- 5:39.13 फिर उसने एक लंबी साँस ली और घबराने के बजाय बिलकुल शांत मन से सोचना शुरू किया। कुछ ही पलों में उसके चेहरे पर एक प्यारी-सी मुस्कान वापस लौट आई, क्योंकि अब उसका सारा डर गायब हो चुका था।
- 5:54.171 दरअसल उसे एक बढ़िया तरकीब सूझ गई थी। अकलू झटपट आम के उसी पुराने पेड़ पर चढ़ा और पानी के ऊपर झुकी हुई एक लंबी डाल पर जाकर चुपचाप बैठ गया और इशारे का इंतज़ार करने लगा।
- 6:09.213 जैसे ही राजा शेर सिंह ने अपने पंजे से आगे बढ़ने का इशारा किया, भैंस धीरे-धीरे पानी में उतरी और अपनी पूरी ताकत लगाकर दूसरे किनारे की ओर तैरना शुरू कर दिया।
- 6:21.255 ठीक उसी पल अकलू ने डाल पकड़कर एक झूला लिया और हल्के-से उछलकर भैंस की चौड़ी पीठ पर आराम से जा बैठा। तैरने में लगी भैंस को शुरू में तो इसका पता ही नहीं चला।
- 6:34.296 बीच पानी में जब भैंस ने अपनी पूँछ हिलाकर उसे पीठ से नीचे उतारना चाहा, तब भी अकलू मज़बूती से पकड़े रहा और अपनी जगह से ज़रा भी नहीं हिला, बल्कि हँसता हुआ बैठा रहा।
- 6:47.338 भैंस ने मन ही मन सोचा कि बैठा रहने दो इसे। तैर तो आख़िर मैं ही रही हूँ, और उस किनारे पर पैर भी सबसे पहले मेरा ही पड़ेगा, इसलिए जीत तो मेरी ही होने वाली है।
- 7:00.38 तालाब का दूसरा किनारा अब बस पास ही रह गया था कि तभी अकलू ने डरे बिना एक बहुत लंबी छलांग लगाई, और हवा में उड़ता हुआ सीधे किनारे की सूखी रेत पर जाकर उतर गया।
- 7:13.421 भैंस उस समय पानी से बाहर निकल ही रही थी। किनारे पर खड़े जंगल के सारे जानवर यह देखकर खुशी से उछल पड़े और ज़ोर-ज़ोर से ताली बजाकर अकलू का नाम पुकारने लगे।
- 7:26.463 अकलू सबसे पहले इस किनारे पर पहुँचा है। इसलिए आज यह बात साफ़-साफ़ साबित हो गई कि ताकत से भी बड़ी अक्ल ही होती है। इस मुकाबले का विजेता हमारा अकलू बंदर ही है।
- 7:40.505 भैंस को अपनी हार का ज़रा भी बुरा नहीं लगा। उसने हँसते हुए अकलू की पीठ थपथपाई और माना कि सचमुच, अकलू की छोटी-सी अक्ल के आगे आज उसकी इतनी बड़ी ताकत भी छोटी पड़ गई।
- 7:55.546 उस दिन के बाद से अकलू और भैंस पक्के दोस्त बन गए। और जब भी कहीं समझदारी ताकत पर भारी पड़ती, तब से लोग हँसकर कहने लगे — अक्ल बड़ी या भैंस। यही कहावत आज भी चली आ रही है।
- 8:09.588 इस कहानी से हमें यही सीख मिलती है कि ताकत की अपनी जगह ज़रूर है, लेकिन जहाँ ताकत हार जाती है, वहाँ शांत मन से सोची गई एक छोटी-सी तरकीब भी रास्ता निकाल देती है।
- 8:22.63 अगर आपको अकलू और भैंस की यह मज़ेदार कहानी अच्छी लगी हो, तो हमारे चैनल को सब्सक्राइब ज़रूर कीजिए, और ऐसी ही और नई-नई कहानियाँ सुनने के लिए हमारे साथ बने रहिए।