विष्णु सामने आए तो ध्रुव ने कुछ क्यों नहीं माँगा?
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विष्णु वरदान माँगने को कहते हैं, लेकिन ध्रुव का मन भक्ति से संतुष्ट हो चुका है। इस पौराणिक प्रसंग में उन्हें राजसिंहासन से भी ऊँचा, आकाश में अटल ध्रुव तारे का स्थान मिलता है।
पूरी कहानी देखें:
https://youtu.be/ZATo6pFf3Uw
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Hindi transcript
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विष्णु ने कहा मांगो जो भी चाहो पर ध्रुव का मन अब पूरी तरह भर चुका था। प्रभु ने उसे सिंहासन से भी ऊंचा स्थान दिया। आकाश का सबसे अटल और ऊंचा तारा सारे तारे उसके चारों ओर घूमते हैं। पर ध्रुव कभी नहीं डिगता। यही सच्ची भक्ति की शक्ति है।